:
Breaking News

सासाराम सदर अस्पताल में घूसखोरी का भंडाफोड़, 20 हजार लेते कर्मचारी दबोचा गया

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

रोहतास के सासाराम सदर अस्पताल परिसर स्थित सिविल सर्जन कार्यालय में निगरानी विभाग ने छापेमारी कर एक कर्मचारी को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया।

सासाराम/आलम की खबर:रोहतास जिले के सासाराम में शुक्रवार को उस समय हड़कंप मच गया जब निगरानी विभाग की टीम ने सदर अस्पताल परिसर स्थित सिविल सर्जन कार्यालय में छापेमारी कर एक कर्मचारी को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। अचानक हुई इस कार्रवाई के बाद पूरे कार्यालय परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और सरकारी दफ्तरों में चल रही कथित घूसखोरी को लेकर फिर बहस तेज हो गई।

जानकारी के मुताबिक निगरानी विभाग को पिछले कुछ दिनों से लगातार शिकायत मिल रही थी कि सिविल सर्जन कार्यालय में कुछ कर्मचारियों द्वारा सरकारी काम कराने के बदले पैसे मांगे जा रहे हैं। आरोप था कि बिना रिश्वत दिए लोगों की फाइल आगे नहीं बढ़ाई जाती और छोटे-छोटे कामों के लिए भी आम लोगों को परेशान किया जाता है। शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया और गुप्त तरीके से जांच शुरू की।

जांच के दौरान पता चला कि कार्यालय में कार्यरत लिपिक Satish Kumar एक व्यक्ति से जरूरी काम कराने के बदले 20 हजार रुपये की मांग कर रहा था। शिकायतकर्ता ने इसकी सूचना निगरानी विभाग को दी। इसके बाद विभाग ने पूरे मामले का सत्यापन कराया। आरोप सही पाए जाने के बाद टीम ने आरोपी को रंगे हाथ पकड़ने की योजना बनाई।

शुक्रवार दोपहर शिकायतकर्ता तय योजना के अनुसार सिविल सर्जन कार्यालय पहुंचा। जैसे ही आरोपी कर्मचारी ने रिश्वत की रकम अपने हाथ में ली, पहले से मौजूद निगरानी विभाग की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ लिया। कार्रवाई इतनी अचानक हुई कि कार्यालय में मौजूद अन्य कर्मचारी कुछ समझ ही नहीं पाए।

रिश्वत लेते कर्मचारी की गिरफ्तारी की खबर कुछ ही मिनटों में पूरे अस्पताल परिसर में फैल गई। अस्पताल में इलाज कराने आए मरीजों और उनके परिजनों के बीच भी इस कार्रवाई की चर्चा शुरू हो गई। लोग कार्यालय के बाहर जमा होने लगे और हर तरफ निगरानी विभाग की कार्रवाई को लेकर बातचीत होने लगी।

सूत्रों के अनुसार निगरानी विभाग की टीम ने मौके से रिश्वत की रकम भी बरामद कर ली है। इसके बाद आरोपी कर्मचारी को हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए अपने साथ ले जाया गया। अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि कहीं इस अवैध वसूली के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है।

बताया जा रहा है कि पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या कार्यालय में लंबे समय से इस तरह की वसूली चल रही थी और इसमें अन्य लोग भी शामिल हैं या नहीं। यदि किसी अन्य कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

निगरानी विभाग के अधिकारियों ने साफ कहा है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। विभाग लगातार ऐसी शिकायतों पर नजर रख रहा है और जहां भी प्रमाण मिल रहे हैं, वहां सख्त कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि किसी सरकारी दफ्तर में उनसे रिश्वत मांगी जाती है तो इसकी सूचना तुरंत निगरानी विभाग को दें।

इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग में भी हलचल बढ़ गई है। सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठते रहे हैं, लेकिन रंगे हाथ गिरफ्तारी होने से विभाग की कार्यप्रणाली फिर सवालों के घेरे में आ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी दफ्तरों में आम लोगों से काम के बदले पैसे मांगना अब सामान्य बात बन चुकी है और ऐसे मामलों पर लगातार कार्रवाई जरूरी है।

सासाराम के लोगों का कहना है कि अस्पताल और सरकारी कार्यालय आम जनता की सुविधा के लिए होते हैं, लेकिन कई बार लोगों को अपने ही काम के लिए बार-बार चक्कर लगाना पड़ता है। कुछ लोगों ने कहा कि यदि इस तरह निगरानी विभाग लगातार कार्रवाई करता रहा तो भ्रष्ट कर्मचारियों में डर पैदा होगा और आम लोगों को राहत मिलेगी।

बिहार में पिछले कुछ वर्षों में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग की कार्रवाई लगातार बढ़ी है। अलग-अलग जिलों में कई सरकारी कर्मचारी और अधिकारी रिश्वत लेते गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इसके बावजूद घूसखोरी की शिकायतें पूरी तरह खत्म नहीं हो पा रही हैं। यही वजह है कि सरकार और प्रशासन पर पारदर्शिता बढ़ाने का दबाव भी लगातार बढ़ रहा है।

राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी भ्रष्टाचार हमेशा बड़ा मुद्दा रहा है। सरकार सुशासन और पारदर्शिता की बात करती रही है, लेकिन इस तरह की घटनाएं प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर देती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि सिस्टम में जवाबदेही और निगरानी बढ़ाने की भी जरूरत है।

फिलहाल निगरानी विभाग पूरे मामले की जांच में जुटा हुआ है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। सासाराम में हुई यह कार्रवाई अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *